RSS Chief Mohan Bhagwat Big Statement

RSS Chief Mohan Bhagwat Big Statement: RSS चीफ मोहन भागवत ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 96 वें स्थापना दिवस पर नागपुर में एक संबोधन किया विजयादशमी के दिन नागपुर में आयोजित किए गए इस कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने पहले शस्त्र पूजन किया। शस्त्र पूजन के बाद मोहन भागवत ने स्वयंसेवकों को संबोधित किया और कई बड़ी बातें कहीं जिस पर विवाद बढ़ता नजर आ रहा है। शस्त्र पूजा के दौरान मुंबई स्थित इजरायली महावाणिज्य दूत कोब्बी शोशानी ने भी बतौर गेस्ट इस कार्यक्रम में शिरकत की। आइये जानते हैं आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान क्या है और उन्होंने अपने सम्बोधन में क्या-क्या कहा?

 

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान

विजयादशमी के अवसर पर अपने सम्बोधन के दौरान RSS चीफ मोहन भागवत ने कहा कि हिंदू समाज को छोटे-छोटे अहंकार को भूल कर सबको अपनाने की नियत रखने की जरूरत है। हिंदू संस्कृति सबको अपनाती है और हमें किसी को अपनाने समय डर नहीं लगना चाहिए। लेकिन हमें डर लगाता है क्योंकि हम दुर्बल हैं। हमें शक्ति संपन्न होना पड़ेगा कि जो हम पर हाठ उठाए उसका हाथ न हो। इतना सामर्थ्य होना चाहिए। लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि सामर्थ्य का उपयोग दुर्बलों की रक्षा के लिए करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ये दुनिया शक्ति की है और बिना शक्ति वो सत्य को भी नहीं मानती है। तो हिंदू समाज को अपने भेद भूलकर संगठित होना पड़ेगा।

 

RSS Chief Mohan Bhagwat Big Statement:

शक्ति पूजन के बाद अपने संबोधन के दौरान मोहन भागवत ने कहा कि यह वर्ष हमारी स्वाधीनता का 75वां वर्ष है। 15अगस्त 1947 को हम स्वाधीन हुए और हमने अपने देश के सूत्र देश को आगे चलाने के लिए स्वयं के हाथों में लिया। स्वाधीनता से स्वतंत्रता की ओर हमारी यात्रा का वह प्रारंभ बिंदु था। हमें यह स्वाधीनता रातों रात नहीं मिली।

अपने सम्बोधन के दौरान आरएसएस प्रमुख ने कहा कि स्वतंत्र भारत का चित्र कैसा हो इसकी भारत की परंपरा के अनुसार समान सी कल्पनाएँ मन में लेकर देश के सभी क्षेत्रों से सभी जातिवर्गों से निकले वीरों ने तपस्या त्याग और बलिदान के हिमालय खड़े किये।

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने इस दौरान कहा कि विभाजन की टीस अब तक नहीं गई है। उन्होंने कहा कि हमारी पीढ़ियों को इतिहास के बारे में बताया जाना चाहिए जिससे की आने वाली पीढ़ी भी अपने आगे की पीढ़ी को इस बारे में बताए। उन्होंने कहा कि समाज की आत्मीयता व समता आधारित रचना चाहने वाले सभी को प्रयास करने पड़ेंगे। सामाजिक समरसता के वातावरण को निर्माण करने का कार्य संघ के स्वयंसेवक सामाजिक समरसता गतिविधियों के माध्यम से कर रहे हैं।

 

विजयादशमी के ही दिन 1925 में हुई थी संघ की स्थापना!

आपको बता दें कि विजयादशमी के ही दिन 1925 में संघ की स्थापना हुई थी। तभी से इस दिन संघ की सभी शाखाओं पर स्वयंसेवक शक्ति के महत्व को याद रखने के लिए आरएसएस के लोग प्रतीकात्मक रूप से शस्त्र पूजन करते हैं। इस दिन आरएसएस द्वारा कई बड़े कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है। ऐसे में आरएसएस के स्थापना दिवस पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान (RSS Chief Mohan Bhagwat Big Statement) बड़ा ही मायने रखता है।

 

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