Allahabad High Court on Ram Krishna insultAllahabad High Court on Ram Krishna insult

Allahabad High Court on Ram Krishna insult: आजकल देश में अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान करना आम हो गया है। लेकिन इसपर संज्ञान लेते हुए ऐसा करने वालों को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नसीहत दी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि संविधान के तहत कुछ प्रतिबंध भी हैं। कोर्ट ने कहा किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचाई जाये। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा राम-कृष्ण के बिना देश अधूरा, इनका अपमान देश का अपमान है।

 

राम-कृष्ण के बिना देश अधूरा!

भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण पर सोशल मीडिया में की गई एक आपत्तिजनक टिप्पणी पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा राम-कृष्ण के बिना देश अधूरा है। भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण का अपमान देश का अपमान है। कोर्ट ने सरकार को इस मामले में उचित कानून बनाने के लिए भी कहा।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण (Allahabad High Court on Ram Krishna insult) पर यह टिप्पणी हाथरस जिले के आकाश जाटव उर्फ़ सूर्य प्रकाश की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए की है। आपको बता दें की सूर्य प्रकाश पर सोशल मीडिया के माध्यम से भगवान राम और भगवान कृष्ण पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप है।

 

इलाहाबाद हाईकोर्ट की धार्मिक टिप्पणी!

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में भी कहा कि भारत का संविधान उदार है। कोर्ट ने कहा की यहाँ धर्म को न मानने वाला नास्तिक हो सकता है पर इससे उसको किसी धार्मिक व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का कोई अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि जैसे किसी नर्तक को मनुष्य की खोपड़ी हाथ में ले कर नाचने की अनुमति नहीं दी जा सकती वैसे ही किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का कोई अधिकार नहीं है।

कोर्ट ने धार्मिक टिप्पड़ी करते हुए कहा कि हम “सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः सर्वे भद्राणि पश्यंतु, माँ कश्चित दुःख भाग भवेत” की कामना करने वाले लोग हैं और हमारी संस्कृति वसुधैव कुटुंबकम की रही है।

 

अश्लीलता और अफवाह अभिव्यक्ति की आजादी नहीं!

इलाहबाद हाईकोर्ट ने इस सुनवाई के दौरान अश्लीलता और अफवाह को अभिव्यक्ति की आज़ादी मानने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने शबरी और निषादराज का उल्लेख करते हुए भगवान श्रीराम को सामाजिक समरसता का सर्वोच्च उदाहरण बताया। आपको बता दें क़ि सूर्यप्रकाश उर्फ़ आकाश जाटव भारतीय दंड संहिता की धारा 295-A व सेक्शन 67-A I.T. एक्ट का आरोपित है।

 

कोर्ट ने कहा संसद बनाए सख्त कानून!

अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर देवी-देवताओं का अपमान करने वालों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संसद से श्रीराम, श्रीकृष्ण, महर्षि वाल्मीकि, महर्षि वेदव्यास, रामायण, श्रीमद्भागवत गीता को देश की धरोहर बताते हुए इन सभी को राष्ट्रीय सम्मान देने वाला कानून पारित करने की अपेक्षा की।

 

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