Vishwakarma Puja kya haiVishwakarma Puja kya hai

Vishwakarma Puja kya hai: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विश्‍वकर्मा दुनिया के सबसे बड़े सिविल इंजीनियर माने जाते हैं। भगवान विश्‍वकर्मा की जयंती हर साल कन्‍या संक्रांति के दिन मनाई जाती है। भगवान विश्‍वकर्मा की जयंती के दिन बड़ी धूम धाम से भगवान विश्वकर्मा की पूजा कथा की जाती है। भगवान विश्वकर्मा को सृजन का देवता कहा जाता है। इसलिए इस दिन भारत के सभी छोटे-बड़े संस्थानों की फ़ैक्टरिओं और ऑफिसेस में भगवान विश्वकर्मा की जयंती बड़े धूम-धाम से मनाई जाती है।

आज हम जानेगे विश्वकर्मा पूजा की पूरी जानकारी, भगवान विश्वकर्मा कौन है? विश्वकर्मा पूजा क्या है? विश्वकर्मा पूजा का महत्व, विश्वकर्मा पूजा का शुभ मुहूर्त, विश्वकर्मा की पूजा विधि, भगवान विश्वकर्मा की उत्पत्ति और कैसे हुई? विश्वकर्मा की पूजा के लाभ क्या है? और जानेंगे क्यों की जाती है विश्वकर्मा की पूजा?

 

Vishwakarma Puja kya hai?

आदि काल के सबसे बड़े निर्माता भगवान विश्‍वकर्मा की जयंती को हर साल विश्वकर्मा पूजा के रूप में मानते है। भगवान विश्‍वकर्मा की जयंती हर साल कन्‍या संक्रांति के दिन मनाई जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार कन्‍या संक्रांति के दिन ही भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था। सनातन मान्यताओं के अनुसार विश्‍वकर्मा पूजा के दिन ख़ास तौर पर औजारों, निर्माण कार्य से जुड़ी मशीनों, दुकानों और कारखानों आदि की पूजा की जाती है।

 

विश्वकर्मा पूजा की पूरी जानकारी

विश्वकर्मा पूजा के दिन सभी कारखानों और औद्योगिक संस्थानों में भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है। विश्वकर्मा पूजा के दिन सुभ मुहूर्त और पूजा बिधि का ख़ास ध्यान रखा जाता है। मान्यताओं के अनुसार सतयुग में स्वर्गलोक, त्रेता युग में लंका और द्वापर युग में भगवान कृष्ण की द्वारका की रचना भी भगवान विश्वकर्मा ने ही की थी। आपको बता दे कि श्रमिक समुदाय से जुड़े लोगों के लिए यह दिन बेहद खास होता है क्योकि विश्वकर्मा पूजा के दिन सभी कारखानों और औद्योगिक संस्थानों में काम बंद करके भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है।

 

भगवान विश्वकर्मा कौन है?

पौराणिक मान्यताओं और सनातन धर्म के अनुसार भगवान विश्वकर्मा को निर्माण व सृजन का देवता कहा जाता है। कहा जाता है कि जब इस ब्रह्माण्ड की रचना ब्रह्मा जी ने की तो इसे सुंदर बनाने का काम भगवान विश्वकर्मा को दिया। इसीलिए भगवान विश्वकर्मा को संसार का सबसे पहला इंजीनियर भी कहा जाता है। पौराणिक कथाओ और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव का त्रिशूल, भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र, यमराज का कालदंड, भगवान कृष्ण की द्वारका, पांडवों के लिए इंद्रप्रस्थ, रावण की लंका, इंद्र के लिए वज्र समेत भगवान विश्वकर्मा ने कई चीजों का निर्माण किया है।

 

भगवान विश्वकर्मा की उत्पत्ति और कैसे हुई?

सनातन मान्यताओं के अनुसार भगवान विश्वकर्मा ब्रह्मा जी के पौत्र वास्तु की संतान थे। पौराणिक कथाओं के अनुसार सृष्टि के प्रारंभ में सर्वप्रथम ‘नारायण’ अर्थात भगवान विष्णु छीर सागर में शेषनाग की शैया पर प्रकट हुए। भगवान विष्णु के नाभि के कमल से चर्तुमुख ब्रह्मा की उत्पत्ति हुई। भगवान ब्रह्मा के पुत्र ‘धर्म’ हुए तथा धर्म के पुत्र ‘वास्तुदेव’ हुए। कथा के अनुसार ब्रम्हा के पुत्र धर्म की ‘वस्तु’ नामक स्त्री से उत्पन्न ‘वास्तु’ सातवें पुत्र थे जो शिल्पशास्त्र के महान प्रवर्तक थे। भगवान विश्वकर्मा वास्तुदेव और अंगिरसी की संतान थे। अपने पिता वास्तुदेव की भांति ही विश्वकर्मा भी वास्तुकला के महान आचार्य बने।

 

विश्वकर्मा पूजा का शुभ मुहूर्त

  • कन्या संक्रान्ति पर विश्वकर्मा पूजा का आयोजन किया जाएगा
  • संक्रान्ति का पुण्य काल 17 सितंबर दिन शुक्रवार को सुबह 6:07 बजे से सुरु होगा।
  • संक्रान्ति का पुण्य 18 सितंबर दिन शनिवार को 3:36 बजे तक पूजन काशुभ मुहूर्त रहेगा।
  • राहुकाल के समय पूजा निषिद्ध है।
  • 17 सितंबर को राहुकाल सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक रहेगा।

 

विश्वकर्मा की पूजा विधि

  • विश्वकर्मा पूजा के दिन सूर्य उगने से पहले उठ जाएं।
  • अपने आपको स्नान से पवित्र करें।
  • अब विश्वकर्मा पूजा की सामग्रियों को एकत्रित कर लें।
  • अपने पूरे परिवार के साथ इस पूजा को शुरू करें।
  • सबसे अच्छा है अगर पति-पत्नी इस पूजा को एक साथ करें।
  • अपने हाथ में चावल लें और भगवान विश्वकर्मा का ध्यान लगायें।
  • इस दिन पूजा के दौरान भगवान विश्वकर्मा को सफेद फूल अर्पित करें।
  • अब धूप, दीप, पुष्प अर्पित करते हुए हवन कुंड में आहुति दें।
  • विश्वकर्मा पूजा के दौरान अपनी मशीनों और सभी औजारों की भी पूजा अवश्य करें।
  • अंत में भगवान विश्वकर्मा को प्रसाद का भोग लगाकर वह प्रसाद सबमे बांट दें।

 

विश्वकर्मा पूजा का महत्व

विश्वकर्मा पूजा का धार्मिक और पौराणिक महत्त्व है। इस पूजा को करने से भगवान विश्वकर्मा प्रसन्न होते है और आपके घर हमेशा सुख समृद्धि बनी रहती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्राचीन काल की सभी राजधानिओं का निर्माण भगवान विश्वकर्मा के द्वारा ही किया गया। सतयुग का ‘स्वर्ग लोक, पुष्पक विमान, त्रेता युग की लंका, द्वापर युग की द्वारिका और कलयुग के हस्तिनापुर और सुदामापुरी के निर्माता विश्वकर्मा ही थे।

 

विश्वकर्मा की पूजा के लाभ क्या है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ये कहा जाता है कि भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से जीवन में कभी भी सुख समृद्धि की कमी नहीं रहती। भगवान विश्वकर्मा की पूजा से आपके कार्य में हमेशा प्रगति बानी रहती है। अगर आप निर्माण के क्षेत्र में काम करते है तो भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से आपको कभी भी किसी प्रकार की मशीनरी दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा।

 

क्यों की जाती है विश्वकर्मा की पूजा?

भगवान विश्वकर्मा की पूजा कारखाने और निर्माण क्षेत्र में तरक्की के उदेश्य से की जाती है। भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से मन की शांति और सुख प्राप्त होता है।विश्‍वकर्मा पूजा के दिन लौह उपकरणों, औजारों, निर्माण कार्य से जुड़ी मशीनों, दुकानों और कारखानों की बिधि पूर्वक पूजा की जाती है। भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से जीवन में सुख समृद्धि बनी रहती है।

 

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