Ramayana Conclave kya haiRamayana Conclave kya hai

Ramayana Conclave kya hai: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अयोध्या में रामायण कॉन्क्लेव का आयोजन किया। Ramayana Conclave in Ayodhya का उदघाटन भारत के राष्ट्रपति श्री Ram Nath Kovind ने किया। इस रामायण कॉन्क्लेव की शुरुआत ब्रह्मचारियों के शंखनाद से हुई। रामायण कान्क्लेव में दो दिन की परिचर्चा होगी व गायन-वादन-नृत्य आदि कलाओं का प्रदर्शन होगा।

रामायण कॉन्क्लेव के उदघाटन के दौरान राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की तारीफ की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने रामायण कॉन्क्लेव का आयोजन कर कला एवं संस्कृति के माध्यम से रामायण को जन-जन तक पहुंचाने का जो अभियान आज शुरू किया है उसके लिए मैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी टीम की सरहाना करता हूं। तो आइये जानते है की Ramayana Conclave kya hai?

 

Ramayana Conclave kya hai?

जानिए क्या है उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अयोध्या में सुरु किया गया रामायण कॉन्क्लेव?

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अयोध्या में रामायण कॉन्क्लेव का आयोजन करा रही है जिसका उदघाटन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने किया। रामायण कॉन्क्लेव का का मुख्य उद्देश्य रामायण को लोगो के दिल तक पहुंचना और रामायण को जन भावना बनाना है। Ramayana Conclave के प्रातःकालीन सत्र में विशिष्ट कथावाचकों तथा रामायण के प्रख्यात विद्वानों द्वारा रामायण के विभिन्न प्रसंगों पर सारगर्भित व्याख्यान और विचार-विमर्श होंगे।

Ayodhya Ramayana Conclave के सायंकालीन सत्र में रामायण एवं रामकथा से सम्बन्धित उच्चस्तरीय सांस्कृतिक प्रस्तुतियां सम्पन्न होंगी। इस दौरान रामलीला एवं लोक बोलियां के कवि सम्मेलनों के माध्यम से रामकथा के विभिन्न सन्दर्भों को भी प्रस्तुत किया जाएगा। समापन के दौरान देश विदेश के प्रख्यात कवि और लेखक अपनी प्रस्तुति देंगे। इस दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मजूद रहेंगे।

 

UP के वो कौन से जिले है जहाँ होगा Ramayana Conclave?

उत्तर प्रदेश राज्य सरकार के प्रवक्ता ने यह जानकारी देते हुए बताया कि आने वाले 29 अगस्त से आरम्भ होकर रामायण कॉन्क्लेव 01 नवम्बर, 2021 तक चलेगा आपको बता दे की रामायण कॉन्क्लेव अलग-अलग चरणों में प्रदेश के विभिन्न स्थानों में सम्पन्न किया जाएगा। जिसमे निम्नलिखित जिले शामिल है।

अयोध्या,
गोरखपुर,
बलिया,
वाराणसी,
विन्ध्याचल,
चित्रकूट,
ललितपुर,
श्रृंग्वेरपुर,
बिठूर,
बिजनौर,
बरेली,
गाजियाबाद,
मथुरा,
गढ़मुक्तेश्वर,
सहारनपुर
लखनऊ

 

Ramayana Conclave के कार्यक्रम

दो दिन चलने वाले रामायण कॉन्क्लेव की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की शुरुआत सायं चार बजे 10 वेदपाठी ब्रह्मचारी शंखनाद एवं वैदिक स्वस्ति वाचन से करेंगे।

उसके तुरंत बाद विजयरामदास एवं उनके साथी पखावज वादन की प्रस्तुति देंगे।

लखनऊ के अग्निहोत्री बंधु गायन की प्रस्तुति देंगे।

अयोध्या के विजय यादव एवं उनके साथी फरुवाही नृत्य भी इसी शाम प्रस्तुत करेंगे।

सायं चार बजे से रामायण कॉन्क्लेव की भावना के अनुरूप सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से श्रीराम और उनकी अयोध्या के व्यापक स्वरूप का निर्वचन होगा।

रामायण कॉन्क्लेव की पहली शाम भजन, रामायण पर केंद्रित आल्हा एवं ढिंढिया नृत्य से भी सजेगी।

रामायण कॉन्क्लेव की प्रथम संध्या का समापन रामलीला की प्रस्तुति से होगा।

अगले दिन सोमवार को सुबह 11 बजे पुनः कॉन्क्लेव की शुरुआत होगी।

शुरुआत में रामकथा में सामाजिक समरसता विषय पर परिचर्चा से होगी।

सामाजिक समरसता विषय पर परिचर्चा के मुख्य वक्ता रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय होंगे।

इस कॉन्क्लेव में जगद्गुरु वासुदेवाचार्य विद्याभास्कर, रामकुंज के महंत रामानंददास, आचार्य मिथिलेशनंदिनीशरण, डॉ. सुनीता शास्त्री एवं डॉ. जनार्दन उपाध्याय जैसे रामकथा मर्मज्ञ शामिल होंगे।

वार्ताकार के रूप में अयोध्या राजपरिवार के सदस्य एवं प्रख्यात लेखक-समीक्षक यतींद्र मिश्र वार्ताकार के रूप में मौजूद रहेंगे।

सोमवार को दोपहर ढाई बजे से सायं साढ़े चार बजे तक संगीत का सत्र संयोजित किया गया है।

राजकुमार झा का पखावज वादन, रामविनोदशरण का पारंपरिक समैया गायन, सत्यप्रकाश मिश्र का भजन एवं मानवेंद्रदास का शास्त्रीय गायन का कार्यक्रम प्रस्तावित है।

शाम को साढ़े चार से रात 10 बजे तक प्रस्तावित सत्र में राजीवरंजन का पखावज वादन, शीतला वर्मा एवं साथियों का लोकनृत्य, शिवपूजन शुक्ल का भजन एवं मुकेश तथा उनके साथी फरुवाही नृत्य प्रस्तुत करेंगे।

 

Ram Nath Kovind On Ramayana Conclave

अयोध्या में सुरु रामायण कॉन्क्लेव पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने क्या कहा?

भारत के राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने रामायण कॉन्क्लेव के उदघाटन के मौके पर कहा की राम किसी एक नहीं है बल्कि राम सबके है। अपने भाषण के दौरान राष्ट्रपति ने कई बार रामायण की चौपाइयों का भी उल्लेख किया।

 

 

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