Raja Mahendra Pratap Singh Biography in Hindi

Raja Mahendra Pratap Singh Biography in Hindi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 सितम्बर हिंदी दिवस के दिन Raja Mahendra Pratap Singh State University, Aligarh की आधारशिला राखी। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने सितंबर, 2019 में अलीगढ़ में राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नाम एक राज्य स्तरीय यूनिवर्सिटी खोलने की घोषणा की थी। अब यह विश्वविद्यालय खूब चर्चा में हैं और लोग राजा महेंद्र प्रताप सिंह के बारे में जानना चाहते है। तो आइये जानते है की राजा महेन्द्र प्रताप सिंह कौन थे?

आइये जानते है की आखिर कौन थे राजा महेन्द्र प्रताप सिंह? राजा महेन्द्र प्रताप सिंह की जीवनी क्या है? राजा महेंद्र प्रताप सिंह स्टेट युनिवर्सिटी अलीगढ़ की पूरी जानकारी क्या है? राजा महेंद्र प्रताप सिंह की पूरी कहानी क्या है? भारत के इतिहास में राजा महेंद्र प्रताप सिंह का कद कितना बड़ा था? और जानेंगे Raja Mahendra Pratap Singh Biography in Hindi.

 

राजा महेन्द्र प्रताप सिंह कौन थे?

राजा महेन्द्र प्रताप सिंह भारत के एक प्रमुख स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। वे आर्यन पेशवा के नाम से मसहूर थे। राजा महेन्द्र प्रताप 1915 में काबुल में बनी पहली भारतीय अंतरिम सरकार के राष्ट्रपति थे। वे एक पत्रकार, लेखक, क्रांतिकारी और एक महान समाज सुधारक थे। वे एक बहुत बड़े दानवीर थे। उनके दानवीर होने का सबसे बड़ा उदहारण अलीगढ मुसलिम यूनिवर्सिटी के लिए दी गई जमीन है। आपको बता दे की AMU के लिए राजा महेन्द्र प्रताप सिंह ने अपनी जमीने दान कर दी थी।

राजा महेन्द्र प्रताप सिंह ने काबुल में भारत की अंतरिम सरकार का गठन किया था और स्वयं को राष्ट्रपति घोसित किया था। ये सरकार प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान बनी थी और भारत के बाहर से संचालित हुई थी। उन्होने 1940 में द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जापान में भारतीय कार्यकारी बोर्ड (Executive Board of India) की स्थापना की थी। राजा महेन्द्र प्रताप सिंह ने अपने कॉलेज के साथियों के साथ मिलकर साल 1911 में बाल्कन युद्ध में भी भाग लिया। आपको बता दे की राजा साहब की देश के प्रति कर्तव्यों को याद करते हुए भारत सरकार ने उनकी याद में एक डाक टिकट जारी किया है।

 

Raja Mahendra Pratap Singh Biography in Hindi.

राजा महेन्द्र प्रताप का जन्म 1 दिसम्बर 1886 को मुरसान रियासत में हुआ था। मुरसान रियासत अब मौजूदा समय में उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में आती है। उनके पिता एक जाट परिवार के थे जो मुरसान रियासत के शासक थे। उनके पिता का नाम राजा घनश्याम सिंह था। राजा महेन्द्र प्रताप अपने पिता के तृतीय पुत्र थे। 3 वर्ष की आयु में हाथरस के राजा हरनारायण सिंह ने उन्हें पुत्र के रूप में गोद ले लिया। इनका विवाह जिन्द रियासत के सिद्धू जाट परिवार घराने की बलवीर कौर से हुआ था।

 

राजा महेन्द्र प्रताप सिंह का जीवन परिचय

नाम महेन्द्र प्रताप
पूरा नाम राजा महेन्द्र प्रताप सिंह
जन्म 1 दिसम्बर 1886
जन्म स्थान हाथरस जिला, UP
राष्ट्रीयता भारतीय
पिता राजा घनश्यामसिंह
दत्तक पिता राजा हरनारायन
पद काबुल में बनी पहली भारतीय अंतरिम सरकार के राष्ट्रपति
सांसद (लोकसभा) कार्यकाल 1957–1962
शिक्षा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, एसटीएस स्कूल (मिंटो सर्कल)
कार्य स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, पत्रकार, लेखक, क्रांतिकारी, समाज सुधारक
पत्नी महारानी बलवीर कौर
बच्चे 2 बच्चे: भक्ति और प्रेम
धर्म हिंदू
मृत्यु 29 अप्रैल 1979 (92 वर्ष की आयु में)
पुरस्कार/ सम्मान 1979 : राजा महेन्द्र सिंह पर डाकटिकट

 

Raja Mahendra Pratap Singh family:

महेन्द्र प्रताप सिंह मौजूदा हाथरस जिले में मुरसान रियासत के शासक राजा घनश्याम सिंह के तृतीय पुत्र थे। सिर्फ 3 वर्ष की हाथरस के राजा हरनारायण सिंह ने उन्हें पुत्र के रूप में गोद ले लिया। इनका विवाह 1902 में जिन्द रियासत के सिद्धू जाट परिवार की बलवीर कौर से हुआ था। इनके 2 बच्चे है। इनकी पुत्री का नाम भक्ति है जिसका जन्म 1909 हुआ था। इनके पुत्र का नाम प्रेम है जिसका जन्म 1913 में हुआ।

 

Raja Mahendra Pratap Singh Educational Qualification:

राजा महेन्द्र प्रताप सिंह की पढ़ाई की शुरुआत अलीगढ़ के सरकारी स्कूल में सुरु हुई। बाद में इन्हे मुहम्मदान एंग्लो ओरिएंटर कॉलेजाइट स्कूल (MAO) में डाल दिया गया। आपको बता दें की मुहम्मदान एंग्लो ओरिएंटर कॉलेजाइट स्कूल को आज अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के नाम से जाना जाता है। राजा महेन्द्र प्रताप सिंह को MAU के संस्थापक सर सैयद अहमद खान से शिक्षा मिली।

 

राजा महेन्द्र प्रताप सिंह का देश की आजादी में योगदान:

राजा महेन्द्र प्रताप सिंह एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, पत्रकार, लेखक, क्रांतिकारी और एक महान समाज सुधारक थे। राजा महेन्द्र प्रताप सिंह देश को स्वंत्रता दिलाने के लिए लगातार प्रयासरत रहे। इसी कड़ी में उन्होंने 1915 में काबुल में पहली भारतीय अंतरिम की घोषणा करते हुए स्वयं को राष्ट्रपति और मौलाना बरकतुल्ला खाँ को प्रधानमंत्री घोसित किया।

  • राजा महेन्द्र प्रताप सिंह प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान इसका लाभ उठाकर भारत को आजादी दिलवाने के इरादे से वे विदेश गये।
  • वे देहरादून से ‘निर्बल सेवक’ समाचार-पत्र निकालते थे। उन्हें उस पत्र में जर्मन के पक्ष में लिखे लेख के कारण अंग्रेजी सरकार द्वारा 500 रुपये का दण्ड किया गया था।
  • उन्हें विदेश जाने के लिए अंग्रेजी सरकार द्वारा रोक लगाकर पासपोर्ट नहीं दिआ गया।
  • मैसर्स थौमस कुक एण्ड संस के मालिक ने बिना पासपोर्ट के राजा महेन्द्र प्रताप और स्वामी श्रद्धानंद के ज्येष्ठ पुत्र हरिचंद्र को इंगलैण्ड ले गया।
  • भारत से निकलने के बाद उन्होंने जर्मनी के शसक कैसर से भेंट की और उसने उन्हें आजादी में हर संभव सहाय देने का वचन दिया।
  • राजा महेन्द्र प्रताप सिंह वहाँ से अफगानिस्तान गये और बुडापेस्ट, बल्गारिया, टर्की होकर हैरत पहुँचे।
  • उन्होंने अफगानिस्तान के बादशाह से मुलाकात कर काबुल में 1 दिसम्बर 1915 को भारत के लिए अस्थाई सरकार की घोषणा की।
  • इसी दौरान वे रूस गये और लेनिन से भी मिले परन्तु लेनिन ने उनकी कोई सहायता नहीं की।
  • 1920 से 1946 विदेशों में भ्रमण करते हुए उन्होंने विश्व मैत्री संघ की स्थापना की।
  • जब वे 1946 में भारत लौटे तो सरदार पटेल की बेटी मणिबेन उनको लेने कलकत्ता हवाई अड्डे गईं।
  • वे 1957–1962 तक संसद (लोकसभा) के सदस्य भी रहे।

 

Raja Mahendra Pratap Singh State University, Aligarh

प्रधानमंत्री मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजा महेन्द्र प्रताप सिंह का देश की आजादी में योगदान को याद रखने और शिक्षा के प्रति उनके प्रेम को जीवित रखने के लिए 14 सितम्बर 2021 को राजा महेंद्र प्रताप सिंह स्टेट युनिवर्सिटी अलीगढ़ (Raja Mahendra Pratap Singh State University, Aligarh) की आधारशिला राखी।

ये विध्वविद्यालय देश के युवाओ को अपनी भाषा में पढाई के लिए प्रेरित करेगा और इस यूनिवर्सिटी के माध्यम से राजा महेन्द्र प्रताप सिंह को इतिहास में याद रखा जायेगा। आपको बता दे की उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सितंबर, 2019 में ही अलीगढ़ में राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नाम एक राज्य स्तरीय यूनिवर्सिटी खोलने की घोषणा की थी। उनका सपना आज साकार हो गया है।

 

राजा महेन्द्र प्रताप सिंह का शिक्षा के प्रति विशेष लगाव था

  • राजा महेंद्र प्रताप सिंह पूरी तरह से एक धर्म-निरपेक्ष व्यक्ति थे और हमेशा से हिन्दू मुस्लिम एकता के पक्षधर रहे।
  • उनकी धर्मनिरपेक्षता का प्रमाण अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी है झा उन्होंने इसके विस्तार के लिए अपनी जमीन दान में दे दी थी।
  • वृन्दावन में 80 एकड़ का एक बाग़ आर्य प्रतिनिधि सभा को दान में दे दिया था जिसमें आज आर्य समाज गुरुकुल और राष्ट्रीय विश्वविद्यालय है।
  • राजा साहब ने एक ट्रस्ट बनाकर सन 1909 में प्रेम महाविद्यालय की स्थापना की।

 

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